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Landlord Port
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लैंडलोर्ड पोर्ट
विश्व भर में लगभग 530 करोड़ टन सामुद्रिक परिवहन जरूरतों को पूरा करने के लिए 2000
से अधिक पोर्ट सक्रिय हैं। विगत कुछ वर्षों में विश्व भर में जारी सुधार प्रक्रिया
के तहत समुद्री पोर्टों के निजीकरण के बढ़ते दौर के बीच हर जगह समुद्री पोर्टों के
संचालन और ढांचागत गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी पर्याप्त मात्रा में बढ़ी
है। ऐसे में उन सभी जगहों पर जहां पोर्ट सेवाओं का संचालन निजी संचालकों के माध्यम
से होता है, जहां पोर्ट-निकाय ढांचागत और नियामक व्यवस्थाएं अपने नियंत्रण में रखता
है पोर्ट के सांगठनिक स्वरूप में मूलभूत परिवर्तन आ जाता है, वह सर्विस पोर्ट स्वरूप
से लैंडलोर्ड पोर्ट स्वरूप में बदल जाता है।.
अवधारणा
वर्ष 1997 के दौरान विश्व के शीर्ष पात्र पोर्टों की समीक्षा से पता चला कि 100 पोर्टों
में से 88 पोर्ट स्वरूप को पुष्ट करते हैं। इस स्वरूप में
पोर्ट निकाय एक भूस्वामी (लैंडलोर्ड) तय करता है, जो प्रभावशाली ढंग से पोर्ट संचालकों
के लिए भूमि और ढांचा उपलब्ध कराते हुए मूलभूत पोर्ट परिसंपत्तियों का प्रबंध करता
है। इस स्वरूप में लैंडलोर्ड पोर्ट योजनाओं, पट्टा निर्धारण, सुरक्षा, जहाजरानी और
सकल सहयोगी क्रियाकलापों में सम्मिलित होगा। प्राथमिक पोर्ट इस्तेमालकर्ताओं के लिए
कार्गो (मालवाही जहाज) सेवाएं, समुद्री सेवाएं, सहयोगी सेवाएं, बर्थ आदि बंधित (कैप्टिव)/बीओटी
आधार पर निजीकृत रहेंगी।.
पोर्ट संचालक और पोर्ट में आवश्यक समझी जाने वाली अन्य आश्वस्तियां भू-पट्टा, बुनियादी
ढांचा और सहयोगी सेवाएं जारी कर उन्हें द्वितीयक प्रयोक्ताओं- कार्गो मालिकों, जहाज
मालिकों और मालवाही जहाज मालिकों को उपलब्ध कराएंगे।.
दक्षता सुधार और आकर्षक दर (कास्ट-इफेक्टिवनेस) की दृष्टि से भारतीय पोर्टों की भूमिका
सर्विस पोर्ट स्वरूप से लैंडलोर्ड पोर्ट स्वरूप में बदल रही है।
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